हाइलैंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के दो मरीजों को दी नई जिंदगी
हाइलैंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रनाथ तिवारी ने ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया की दो सफल सर्जरी की, ऐसी सर्जरी जो मरीजों को फिर से मुस्कुराने में मदद करती है

शाहिद शौकत
ठाणे, हाइलैंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ठाणे ने हाल ही में दो मरीजों का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया, जो ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया (टीएन) नामक एक विशेष नस से जुड़ी समस्या से पीड़ित थे। इसे ‘सुसाइड डिजीज’ भी कहा जाता है। चिकित्सा विज्ञान में टीएन को सबसे असहनीय दर्द वाली बीमारियों में गिना जाता है। चेहरे में होने वाले इस असहनीय दर्द और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके गहरे असर की वजह से इसे ‘सुसाइड डिजीज’ कहा जाता है। हालांकि यह बीमारी दुर्लभ है, लेकिन अक्सर इसका गलत निदान हो जाता है, जिसके कारण कई मरीजों को अनावश्यक रूप से कष्ट उठाना पड़ता है। यह बीमारी नींद, भोजन, बातचीत और रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित कर देती है और व्यक्ति के शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है। भारत के जाने-माने न्यूरोसर्जन व हाइलैंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के कंसल्टेंट डॉ. चंद्रनाथ तिवारी ने दो मरीजों — तबस्सुम हफीज और नामदेव पाटील — का सफलतापूर्वक आॅपरेशन किया और उनके चेहरे पर फिर से मुस्कान लौटा दी। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने भी इसी बीमारी के लिए सर्जरी करवाई थी।
हाइलैंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के भारत के प्रमुख न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रनाथ तिवारी ने बताया, ‘‘ टीएन एक प्रकार की पुरानी दर्द वाली स्थिति है जो ट्राइजेमिनल नर्व को प्रभावित करती है। यह चेहरे की मुख्य नस होती है जिसकी तीन शाखाएं होती हैं, जो माथे, गाल और जबड़े तक संवेदना पहुंचाती हैं। दर्द एक या अधिक शाखाओं को प्रभावित कर सकता है और प्राय: यह एकतरफा होता है, लेकिन दुर्लभ मामलों में दोनों तरफ भी हो सकता है।’’
डॉ. चंद्रनाथ तिवारी ने आगे बताया, ‘‘यह समस्या अधिकतर 50 साल से ऊपर के लोगों में पाई जाती है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकती है। सिर्फ अमेरिका में हर साल लगभग 1.5 लाख नए मामले दर्ज होते हैं। टीएन की पुष्टि करने के लिए कोई एकमात्र टेस्ट नहीं है, इसलिए इसे पहचानना कठिन होता है। माइग्रेन, साइनस संक्रमण या टीएमजे (टेम्परोमैंडिबुलर जॉइंट) जैसी अन्य स्थितियां भी चेहरे में दर्द पैदा करती हैं। टीएन के साथ जीवन जीना भावनात्मक और शारीरिक रूप से बेहद थका देने वाला होता है, लेकिन इलाज संभव है। अगर किसी को चेहरे में असहनीय या अज्ञात कारण से दर्द हो रहा है तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या पेन स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।
डॉ. चंद्रनाथ तिवारी ने आगे कहा, ‘‘टीएन का दर्द शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कष्टकारी होता है। दर्द के दौरे कुछ समय के लिए बंद हो जाते हैं और फिर लौट आते हैं। गाल को छूने या हल्की कंपन (जैसे शेविंग, चेहरा धोना, मेकअप करना, दांत साफ करना, नाक साफ करना, खाना-पीना, बातचीत करना या हवा लगना) से भी दर्द शुरू हो सकता है। यह दर्द चेहरे के छोटे हिस्से तक सीमित रह सकता है या फैल भी सकता है। नींद के दौरान यह दर्द शायद ही कभी होता है। कई मामलों में यह स्थिति बढ़ती जाती है और दर्द के दौरे लंबे और बार-बार आने लगते हैं।’’
रायगढ़ जिले की 26 वर्षीय महिला तबस्सुम खलील हफीज फरवरी 2024 से ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया से पीड़ित थीं। उन्हें शुरू में लगा कि यह दांतों की समस्या है, इसलिए कई दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) के पास गर्इं, क्योंकि उनके चेहरे के दाहिने हिस्से में दर्द था। डॉक्टरों को भी लगा कि यह अक्ल दाढ़ का दर्द है।
तबस्सुम हफीज ने बताया, ‘‘फरवरी 2024 से मैं हर महीने अलग-अलग दंत चिकित्सकों के पास जाती रही। मैंने रोहा तालुका, मानगांव तालुका, अलीबाग तालुका के लगभग सभी डॉक्टरों से परामर्श लिया। मई 2024 में मैंने रूट कैनाल उपचार भी करवाया। लेकिन दर्द कभी कम नहीं हुआ। फिर मेरा अक्ल दाढ़ भी यह सोचकर निकलवाया गया कि दर्द कम हो जाएगा, लेकिन दर्द कभी कम नहीं हुआ।
तबस्सुम हफीज ने आगे कहा, ‘‘मैंने मुंबई मीरा रोड स्थित एक दंत चिकित्सक से भी सलाह ली, लेकिन दुर्भाग्य से कोई भी यह नहीं बता पाया कि यह समस्या न्यूरोलॉजी से जुड़ी है। मेरी हालत और दर्द दिन-ब-दिन बढ़ता ही गया। जबड़े में दर्द की वजह से मेरे होंठ लगभग जुड़ गए थे, इसलिए मैं न तो बोल पा रही थी, न खा पा रही थी और न ही पानी पी पा रही थी। यहां तक कि जैसे बच्चों को भोजन दिया जाता है, उसी तरह मुझे भी मसलकर चम्मच से खाना दिया जाता था और पीने का पानी भी चम्मच से ही देना पड़ता था।’’
आखिरकार तबस्सुम ने अलीबाग के एक दंत चिकित्सक डॉ. अक्षय शिंदे से परामर्श किया और उन्होंने लीलावती अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. गिरीश सोनी से परामर्श करने का सुझाव दिया, जो महीने में एक बार अलीबाग आते हैं। डॉ. गिरीश सोनी ने एमआरआई कराने का सुझाव दिया और रिपोर्ट में नसों में क्षति दिखाई दी। उन्होंने मरीज को तुरंत हाइलैंड सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रनाथ तिवारी के पास जाने की सलाह दी। परामर्श के दौरान डॉ. चंद्रनाथ तिवारी ने कहा कि यह ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का मामला है। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता सलमान खान भी इसी समस्या से पीड़ित थे और हाल ही में उनका आॅपरेशन हुआ था। डॉ. चंद्रनाथ तिवारी ने तुरंत आॅपरेशन कराने का सुझाव दिया। तबस्सुम को तुरंत हाइलैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया और 19 अगस्त, 2025 को उनका आॅपरेशन हुआ और एक हफ्ते में उन्हें छुट्टी दे दी गई। आज तबस्सुम पिछले दो वर्षों से झेल रहे दर्द से पूरी तरह मुक्त हो चुकी हैं और उनके जीवन में मुस्कान लौट आई है। अब तबस्सुम दर्द मुक्त सामान्य जीवन जी रही हैं और सामान्य रूप से भोजन -पानी ले रही हैं।
तबस्सुम हफीज ने अपनी बात को विराम देते हुए कहा, ‘‘मैं वास्तव में ईश्वर की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे हाइलैंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल पहुंचाया और यहां डॉ. चंद्रनाथ तिवारी से मिलवाया। उन्होंने मुझे नई जिंदगी दी और फिर से मुस्कुराने में मदद की।
एक और मरीज, 53 वर्षीय नामदेव पाटील, जो भिवंडी के दिवे अंजुर के निवासी और रिक्शा चालक हैं, ने भी ठाणे के हाइलैंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया की सर्जरी करवाई। जैसे तबस्सुम ने बताया था, वैसे ही नामदेव ने भी दंत चिकित्सक से परामर्श लिया था, जिन्होंने दो महीने की दवाइयां दीं, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ।
नामदेव पाटील ने कहा, ‘‘दर्द बहुत तेज था, यह झटके जैसा दर्द चेहरे के दाहिनी ओर होता था और असहनीय था। मैं ठीक से खा-पी और बात भी नहीं कर पा रहा था। जब दवाइयां असर नहीं कर रही थीं तो डॉक्टर ने एमआरआई कराने को कहा और नस की क्षति का पता चला। मेरे एक मित्र, जो डॉ. चंद्रनाथ तिवारी के मरीज रह चुके थे, ने मुझे उनसे मिलने की सलाह दी और इस तरह मैं हाइलैंड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल पहुंचा। डॉ. तिवारी ने 13 मई 2025 को मेरा आॅपरेशन किया और मैं डॉ. तिवारी और ईश्वर का आभारी हूं कि अब मैं उस असहनीय दर्द से मुक्त हूं और अपनी सामान्य जिंदगी में लौट आया हूं।’’
डॉ. चंद्रनाथ तिवारी ने आगे कहा, ‘‘टीएन जैसी ही कई अन्य दर्दनाक स्थितियां होती हैं, जैसे ट्राइजेमिनल न्यूरोपैथी, दर्दनाक ट्रॉमैटिक ट्राइजेमिनल न्यूरोपैथी, ट्रॉमैटिकली इंड्यूस्ड न्यूराल्जिया और एटिपिकल ओडोंटाल्जिया में कई समान लक्षण पाए जाते हैं और इन्हें न्यूरोपैथिक दर्द के रूपों में देखा जाता है। एटिपिकल फेशियल पेन, जिसे पर्सिस्टेंट इडियोपैथिक फेशियल पेन भी कहा जाता है, का भी दर्द का वितरण और स्वभाव लगभग इसी तरह का होता है।’’
डॉ. चंद्रनाथ तिवारी ने समापन करते हुए कहा,‘‘इंटरनेशनल हेडेक सोसाइटी ने सिरदर्द संबंधी विकार ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया (टीएन) को एकतरफा विकार के रूप में परिभाषित किया है, जिसकी विशेषता है- बिजली के झटके जैसे दर्द, जो अचानक शुरू होते हैं और अचानक ही समाप्त हो जाते हैं, और यह दर्द ट्राइजेमिनल नर्व की एक या अधिक शाखाओं तक सीमित रहता है। टीएन, न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा उपचारित सबसे दर्दनाक स्थितियों में से एक है।’’
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