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कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक और अध्यक्ष अभिजीत दिपके शनिवार को देश की राजधानी नई दिल्ली पहुंचे।

कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक और अध्यक्ष अभिजीत दिपके शनिवार को देश की राजधानी नई दिल्ली पहुंचे।लेकिन दिल्ली की जमीन पर कदम रखते ही उन्होंने जो किया, उसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है। दिल्ली पहुंचते ही अभिजीत दिपके के हाथ में भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की आत्मकथा की प्रति (किताब) दिखाई दी। बाबासाहेब की इस तस्वीर और किताब को हाथ में लेकर उन्होंने देश को एक बहुत बड़ा और गहरा संदेश देने की कोशिश की है।

​आखिर क्यों दिल्ली पहुंचे हैं अभिजीत दिपके?

​(गंभीर और गंभीर आवाज़ में)

आपके मन में सवाल होगा कि आखिर कॉकरोच जनता पार्टी के अध्यक्ष इस तरह दिल्ली क्यों पहुंचे हैं? तो आपको बता दें कि अभिजीत दिपके दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आयोजित एक बड़े प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं।

​देश में युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा है। दिल्ली पहुंचते ही दिपके ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से एक खास अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और अनुशासित होना चाहिए। क्योंकि बाबासाहेब ने हमेशा हमें संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का रास्ता दिखाया है।

​किन मुद्दों को लेकर आर-पार की लड़ाई?

​(मुद्दों पर जोर देते हुए)

अब बात करते हैं कि आखिर कॉकरोच जनता पार्टी किन मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरी है। पार्टी इस समय देश के सबसे संवेदनशील और जरूरी मुद्दों को उठा रही है:

​शिक्षा व्यवस्था में सुधार: देश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग।

​परीक्षाओं में अनियमितताएं: हाल के दिनों में परीक्षाओं में जो धांधली, पेपर लीक और गड़बड़ियां सामने आई हैं, उनके खिलाफ सख्त कानून और कार्रवाई की मांग।

​युवाओं का भविष्य: देश के करोड़ों बेरोजगार और संघर्ष कर रहे युवाओं को रोजगार और उनके अधिकारों को दिलाने की आवाज।

​बाबासाहेब की तस्वीर के पीछे का संदेश

​(प्रभावशाली आवाज़ में)

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाथ में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की किताब लेकर दिल्ली पहुंचना, यह साफ दिखाता है कि CJP युवाओं और शिक्षा के इस आंदोलन को संविधान के दायरे में रहकर एक बड़ी क्रांति का रूप देना चाहती है। अभिजीत दिपके का यह अंदाज यह भी संदेश देता है कि शिक्षा और हक की लड़ाई सिर्फ किताबों से और सही नीतियों से ही जीती जा सकती है।

​अब देखना यह होगा कि जंतर-मंतर पर होने वाले इस प्रदर्शन का सरकार पर कितना असर पड़ता है और युवाओं की इन मांगों को कब तक पूरा किया जाता है।

Harry Shaikh

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