
Shahid Shaukat
मुंबई: गोवंडी के शिवाजीनगर इलाके से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एमआईएम की नगरसेविका रोशन इरफान शेख का पद खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज और गलत वंशावली के आधार पर ओबीसी (जुलाहा) जाति प्रमाणपत्र हासिल कर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
सूत्रों के मुताबिक, प्रभाग 138 से चुनाव जीतने वाली रोशन शेख को 7499 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के महफूज शेख को 5525 और शिवसेना (ठाकरे गुट) के अर्जुन शिंदे को 2673 वोट मिले थे। चुनाव परिणाम के बाद ही उनकी जाति वैधता पर सवाल उठाए गए थे, जिसके चलते संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई गई।
मामले की जांच के लिए दस्तावेज परभणी की जाति प्रमाणपत्र जांच समिति को भेजे गए थे। जांच में यह सामने आया कि रोशन शेख ने परभणी के गंगाखेड़ में स्थायी निवास न होने के बावजूद वहां के कागजात का इस्तेमाल कर जुलाहा (ओबीसी) प्रमाणपत्र हासिल किया। रिपोर्ट में इस बात के संकेत मिले हैं कि उन्होंने गलत जानकारी देकर असली पात्र उम्मीदवार का हक छीना।
जांच समिति ने अपने विस्तृत अहवाल में प्रमाणपत्र रद्द करने और उनकी नगरसेविका की सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं, जो उनके खिलाफ कार्रवाई को मजबूत आधार दे सकते हैं।
अब जानकारी मिल रही है कि रोशन शेख इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही हैं। संविधान उन्हें यह अधिकार देता है, लेकिन कोर्ट का रुख क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले मुंब्रा की एमआईएम नगरसेविका सेहर शेख भी इसी तरह के मामले में विवादों में रही हैं। ऐसे में अब यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर काफी गंभीर होता जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनाव प्रक्रिया और जाति प्रमाणपत्र व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ लोकतंत्र के मूल्यों पर चोट है, बल्कि योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का भी हनन है।
अब देखना यह होगा कि अदालत क्या फैसला देती है और क्या रोशन शेख अपना पद बचा पाती हैं या नहीं। फिलहाल, यह मामला मुंबई की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।