गोवंडी वार्ड नंबर 138 में राजनीतिक खींचतान, जनता की समस्याओं के समाधान पर सवालिया निशान

गोवंडी वार्ड नंबर 138 में राजनीतिक खींचतान, जनता की समस्याओं के समाधान पर सवालिया निशान
महफूज आजमी का 28 अक्टूबर से वार्ड में सक्रिय होने का ऐलान, वहीं रोशन इरफान शेख को कानूनी लड़ाई के जरिए दोबारा कॉरपोरेटर सूची में नाम शामिल होने की उम्मीद; दोनों के बीच राजनीतिक खींचतान से जनता परेशान
मुंबई (शाहिद शौकत):
गोवंडी के घनी आबादी वाले एम-ईस्ट वार्ड नंबर 138 में राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर तेज होने के आसार हैं। एक ओर बीएमसी चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार महफूज आजमी ने 28 अक्टूबर से वार्ड की जनसमस्याओं को लेकर मैदान में उतरने का ऐलान किया है, तो दूसरी ओर एआईएमआईएम से निर्वाचित रोशन इरफान शेख ने कॉरपोरेटरों की सूची से नाम हटाए जाने के बावजूद जनता की सेवा जारी रखने और कानूनी लड़ाई के जरिए दोबारा सूची में नाम शामिल होने की उम्मीद जताई है। हालांकि, दोनों के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच वार्ड की समस्याओं के समाधान को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
रोशन इरफान शेख का कहना है कि वह 27 अप्रैल को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद भी वार्ड के विकास कार्यों और जनता की समस्याओं को लेकर जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं। महफूज आजमी के 28 अक्टूबर से मैदान में उतरने के ऐलान पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें 28 अप्रैल से ही जनता के बीच सक्रिय हो जाना चाहिए था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब छह महीने बाद मैदान में उतरने की बात कही जा रही है।
वहीं, महफूज आजमी का कहना है कि वह 28 अक्टूबर से वार्ड नंबर 138 की समस्याओं को लेकर सक्रिय होंगे। उन्हें पूरा विश्वास है कि वह इस लड़ाई में कामयाब होंगे। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि विधायक अबू आसिम आजमी उनके साथ हैं, जिससे उन्हें जनता के मुद्दों पर संघर्ष करने का हौसला मिल रहा है।
दूसरी ओर, रोशन इरफान शेख का कहना है कि एम-ईस्ट वार्ड के कॉरपोरेटरों की सूची से नाम हटाए जाने के बावजूद उन्होंने जनता से अपना संपर्क नहीं तोड़ा है। उनके मुताबिक, वह आज भी वार्ड के लोगों के बीच मौजूद हैं और उनकी परेशानियों को दूर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हारने के बाद कुछ लोग जनता के बीच नजर नहीं आते, जबकि वह लगातार अपने वार्ड के लोगों के संपर्क में रहकर उनकी समस्याओं को हल करने का प्रयास कर रही हैं।
रोशन इरफान शेख ने आगे कहा कि उनकी कानूनी लड़ाई अदालत में जारी है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही उनका नाम दोबारा एम-ईस्ट वार्ड के कॉरपोरेटरों की सूची में शामिल हो जाएगा। उन्हें विश्वास है कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए उन्हें न्याय मिलेगा।
राजनीतिक खींचतान के बीच जनता की समस्याएं कौन सुलझाएगा?
वार्ड नंबर 138 की मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजनीतिक दावों, कानूनी लड़ाई और एक-दूसरे पर बढ़त साबित करने की कोशिशों के बीच आम जनता की समस्याओं का समाधान कब और कैसे होगा? वार्ड के नागरिकों को पानी, सफाई, सड़कों, जलनिकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी प्रतिनिधित्व की जरूरत है।
एक ओर महफूज आजमी 28 अक्टूबर से जनता की समस्याओं को लेकर मैदान में उतरने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर रोशन इरफान शेख जनता के बीच सक्रिय रहने और कानूनी लड़ाई के जरिए दोबारा सूची में जगह पाने को लेकर आशावान हैं। ऐसे में वार्ड के नागरिकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजनीतिक दावे कब ठोस कार्रवाई में बदलेंगे।
जनता के बीच यह सवाल लगातार अहम होता जा रहा है कि राजनीतिक मतभेद और कानूनी मामले अपनी जगह हैं, लेकिन इनका खामियाजा आम नागरिक क्यों भुगतें? लोगों को बयानबाजी और दावों से ज्यादा जमीनी स्तर पर काम तथा बुनियादी सुविधाओं के बेहतर इंतजाम का इंतजार है।



